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FCRA New Rules: विदेशी फंड लेने वाले NGO पर सरकार सख्त, नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना और बढ़ी जवाबदेही

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गृह मंत्रालय ने FCRA नियमों में बदलाव किया है। विदेशी अंशदान के गलत इस्तेमाल पर अब भारी जुर्माना लगेगा। NGO के पंजीकरण, खर्च और पारदर्शिता को लेकर नए नियम लागू किए गए हैं।

केंद्र सरकार ने विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम यानी FCRA के नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए गैर-सरकारी संगठनों (NGO) के लिए विदेशी धन के इस्तेमाल को लेकर निगरानी और जवाबदेही बढ़ा दी है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी नई अधिसूचना के बाद अब विदेशी चंदे के दुरुपयोग, नियमों के उल्लंघन और गलत तरीके से धन खर्च करने पर पहले से अधिक सख्त आर्थिक कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।

सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य विदेशी सहायता के इस्तेमाल में पारदर्शिता लाना और यह सुनिश्चित करना है कि भारत में आने वाला विदेशी धन निर्धारित सामाजिक, शैक्षणिक, धार्मिक या अन्य स्वीकृत उद्देश्यों के लिए ही खर्च हो। नए नियमों के तहत NGO को अपने कामकाज, उद्देश्य और विदेशी धन के उपयोग से जुड़ी जानकारी अधिक स्पष्ट तरीके से उपलब्ध करानी होगी।

गृह मंत्रालय ने FCRA, 2010 के अंतर्गत कई उल्लंघनों के लिए जुर्माने की राशि में संशोधन किया है। अब विदेशी अंशदान का गलत उपयोग करने वाले संगठनों पर आर्थिक कार्रवाई और सख्त होगी। प्रशासनिक खर्चों के लिए तय सीमा से अधिक विदेशी धन खर्च करने पर भी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

नए प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई संगठन प्रशासनिक कार्यों में विदेशी अंशदान की निर्धारित 20 प्रतिशत सीमा से अधिक राशि खर्च करता है तो उस पर कम से कम एक लाख रुपये या सीमा से अधिक खर्च की गई राशि का पांच प्रतिशत, जो भी अधिक होगा, उतना जुर्माना लगाया जा सकता है।

इसी तरह यदि किसी NGO द्वारा विदेशी धन का उपयोग सट्टेबाजी जैसी प्रतिबंधित गतिविधियों में किया जाता है तो उस पर एक लाख रुपये या इस्तेमाल की गई राशि का 30 प्रतिशत, जो भी अधिक होगा, जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा ऐसी गतिविधियों से प्राप्त लाभ की पूरी राशि भी वसूल की जा सकती है।

विदेशी धन को उस उद्देश्य के अलावा किसी अन्य कार्य में खर्च करने पर भी कड़ी कार्रवाई होगी। ऐसे मामलों में एक लाख रुपये या गलत तरीके से इस्तेमाल की गई राशि का 30 प्रतिशत, जो भी अधिक हो, जुर्माने के रूप में वसूला जाएगा।

विदेशी अंशदान स्वीकार करने या खर्च करने में FCRA नियमों का उल्लंघन करने पर भी समान दंड का प्रावधान किया गया है। इसमें ऐसे राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में विदेशी धन का इस्तेमाल करना भी शामिल है, जहां NGO को संचालन की अनुमति नहीं मिली है।

NGO पंजीकरण प्रक्रिया में भी बदलाव

सरकार ने केवल जुर्माने तक ही बदलाव सीमित नहीं रखे हैं, बल्कि NGO के पंजीकरण और नवीनीकरण की प्रक्रिया को भी अधिक व्यवस्थित बनाया है। अब विदेशी धन प्राप्त करने के लिए आवेदन करने वाले संगठनों को अपने उद्देश्य और कार्य क्षेत्र की जानकारी अधिक स्पष्ट रूप से देनी होगी।

नए नियमों के तहत NGO को अपने उद्देश्यों का चयन सरकार द्वारा निर्धारित सूची में से करना होगा। संगठन अपनी मनमानी तरीके से उद्देश्य दर्ज नहीं कर सकेंगे। इससे सरकार को यह समझने में आसानी होगी कि किस संस्था को किस उद्देश्य के लिए विदेशी सहायता प्राप्त हो रही है।

धार्मिक गतिविधियों से जुड़े संगठनों के लिए भी नियमों को स्पष्ट किया गया है। धार्मिक शिक्षा, परंपराओं के दस्तावेजीकरण और स्थानीय विश्वासों के संरक्षण जैसे कार्य धर्म परिवर्तन जैसी गतिविधियों से अलग होने चाहिए।

अब NGO को आवेदन प्रक्रिया के दौरान अपने सोशल मीडिया अकाउंट की जानकारी भी देनी होगी। सरकार का मानना है कि इससे संस्थाओं की गतिविधियों को समझने और सार्वजनिक पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

पुराने NGO को भी देनी होगी जानकारी

नई व्यवस्था के तहत वर्ष 2026 से पहले पंजीकृत सभी संगठनों को अपने निर्धारित उद्देश्य और गतिविधियों की जानकारी सरकार को उपलब्ध करानी होगी। यदि कोई संगठन अपने कार्य क्षेत्र या उद्देश्य में विस्तार करना चाहता है तो इसके लिए अतिरिक्त शुल्क भी देना होगा।

नए नियमों के अनुसार प्रत्येक अतिरिक्त राज्य या नए उद्देश्य को जोड़ने पर 300 रुपये का अतिरिक्त शुल्क निर्धारित किया गया है।

सरकार ने निष्क्रिय पड़े NGO पर भी शिकंजा कसने की तैयारी की है। अब ऐसे संगठनों को FCRA लाइसेंस बनाए रखने के लिए यह साबित करना होगा कि वे वास्तव में सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय हैं।

नियमों के अनुसार किसी NGO को पिछले दो वित्तीय वर्षों में अपने स्वीकृत कार्यों पर कम से कम 10 लाख रुपये विदेशी अंशदान खर्च करना होगा। ऐसा नहीं करने वाले संगठनों के पंजीकरण के नवीनीकरण पर सवाल उठ सकता है।

विदेशी दाताओं की जानकारी देना अनिवार्य

सरकार ने विदेशी धन के स्रोत को लेकर भी नियम सख्त किए हैं। यदि पैसा किसी मध्यस्थ संस्था, फंड ट्रांसफर माध्यम या दाता सलाह वाले फंड के जरिए आता है तो NGO को वास्तविक अंतिम दाता की जानकारी देनी होगी।

इस बदलाव का उद्देश्य यह पता लगाना है कि भारत में आने वाले विदेशी धन का वास्तविक स्रोत कौन है और उसका उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जा रहा है।

इसके अलावा पूर्व अनुमति के आधार पर विदेशी धन प्राप्त करने वाले संगठनों के लिए भी नियम बदले गए हैं। अब अगली किस्त प्राप्त करने से पहले उन्हें यह दिखाना होगा कि पहले मिली राशि का कम से कम 75 प्रतिशत हिस्सा निर्धारित उद्देश्य में खर्च किया जा चुका है।

सरकार जरूरत पड़ने पर ऐसे संगठनों की गतिविधियों की जांच भी कर सकेगी।

जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में कदम

विशेषज्ञों के अनुसार FCRA में किए गए ये बदलाव विदेशी सहायता प्राप्त करने वाले संगठनों के लिए निगरानी व्यवस्था को मजबूत करेंगे। जहां एक ओर इससे वास्तविक सामाजिक कार्य करने वाले संगठनों को नियमों के पालन में स्पष्टता मिलेगी, वहीं दूसरी ओर गलत तरीके से विदेशी धन का उपयोग करने वालों पर कार्रवाई आसान होगी।

केंद्र सरकार लगातार यह प्रयास कर रही है कि विदेशी योगदान का इस्तेमाल देशहित और घोषित उद्देश्यों के अनुरूप हो। नए नियम इसी दिशा में उठाया गया कदम माने जा रहे हैं।

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विदेशी सहायता प्राप्त करने वाले संगठनों की भूमिका समाज के विकास में महत्वपूर्ण रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुधार और जनकल्याण जैसे क्षेत्रों में कई संस्थाएं लंबे समय से काम कर रही हैं। ऐसे में विदेशी धन के उपयोग में पारदर्शिता जरूरी है।

FCRA के नए बदलाव सरकार और NGO के बीच जवाबदेही की व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश हैं। नियमों का पालन करने वाले संगठनों को इससे परेशानी नहीं होनी चाहिए, लेकिन गलत तरीके से धन का इस्तेमाल करने वाली संस्थाओं पर नियंत्रण जरूरी है।

विदेशी फंड का सही उपयोग सुनिश्चित करना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि उन सभी संस्थाओं की जिम्मेदारी है जो जनता और समाज के लिए काम करने का दावा करती हैं।

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